Thursday, April 3आदिवासी आवाज़

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आदिवासी समाज को सीखना होगा ‘आदिवासियत’ और ‘आधुनिकता’ में संतुलन बनाना

आदिवासी समाज को सीखना होगा ‘आदिवासियत’ और ‘आधुनिकता’ में संतुलन बनाना

Breaking News, आदिवासी, आदिवासी संस्कार, विचार
अनेक मंच और विश्व पटल पर जब भी किसी आदिवासी समाज की बात होती है तो अमूमन एक जंगल में निवास करने वाला और विचित्र वेशभूषा के साथ अपने त्वचा को रंगा एक छवि प्रस्तुत की जाती है। 21 वीं शताब्दी में भी विशाल जनमानस आदिवासी को जंगली ही मानते हैं। परिवर्तन एक अटूट सत्य है और जब सभी समाजों में परिवर्तन हुआ है, तो आदिवासी समाज में भी परिवर्तन क्यों नहीं होना चाहिए? लोग अचंभित होते हैं जब एक आदिवासी ‘वृहद् समाज’ का अंग बनता है। आदिवासी समाज में भी परिवर्तन हुआ है, किंतु वह धीमी गति से हुआ है। इसका एक ठोस वैज्ञानिक कारण है। पुरातत्व मानवशास्त्र में एक विख्यात सिद्धांत है। पुरातन काल में मनुष्य की आवश्यकताएँ सीधे प्रकृति से पूरी होती थी। मनुष्य आवश्यकता अनुरूप प्रकृति से संसाधन प्राप्त करता था। धीरे धीरे यह आवश्यकता पूंजीवाद में बदला और फिर प्रकृति का दोहन अनियंत्रित हो गया। औद्योगिक क्रांति के बाद ...
ग्रामीण-आदिवासी छात्रों को अब घर बैठे एआईसीटीई प्लेसमेंट पोर्टल से नौकरी

ग्रामीण-आदिवासी छात्रों को अब घर बैठे एआईसीटीई प्लेसमेंट पोर्टल से नौकरी

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नई दिल्ली। अब ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के इलाकों में पढ़ने वाले इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फार्मेसी, आर्किटेक्चर समेत अन्य पाठ्यक्रमों के छात्रों को नौकरी के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के छात्रों को घर बैठे नौकरी और नियाेक्ता की जानकारी मिलेगी। इसके लिए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने विशेष ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के तकनीकी कॉलेजों के छात्रों के लिए एआईसीटीई प्लेसमेंट पोर्टल लांच किया है। इसके माध्यम से कंपनियां इन कॉलेजों में जाकर कैंपस प्लेसमेंट करेंगी। खास बात यह है कि पोर्टल लांच के कुछ घंटों में ही 2200 से अधिक सरकारी और मल्टीनेशनल कंपनियों में पंजीकरण कर लिया है। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के अध्यक्ष प्रोफेसर टीजी सीमाराम ने कहा है बड़े शहरों के छात्रों के लिए रोजगार की दिक्कत नहीं आती है। लेकिन ग्रामीण और आदिव...
ग्रामीणों ने बेरमो के वन क्षेत्र पदाधिकारी को दी लिखित शिकायत 

ग्रामीणों ने बेरमो के वन क्षेत्र पदाधिकारी को दी लिखित शिकायत 

Breaking News, आदिवासी, झारखण्ड, राजनीति
बोकारो थर्मल ः बोकारो थर्मल थाना क्षेत्र अंतर्गत नया बस्ती के ग्रामीणों ने बेरमो के वन क्षेत्र पदाधिकारी को बोकारो थर्मल-नया बस्ती मेन रोड के किनारे दायीं ओर वन भूमि पर जमीन पर कब्जा कर आवास बनाने को लेकर लिखित शिकायत की है। शिकायती पत्र की प्रतिलिपि बोकारो डीसी, बोकारो के वन प्रमंडल पदाधिकारी तथा बोकारो थर्मल थाना प्रभारी को दी गई है। ग्रामीणों का कहना है कि लिखित शिकायत के बाद भी वन क्षेत्र पदाधिकारी ने उक्त स्थल पर आकर जांच करना गंवारा नहीं समझा। नया बस्ती एवं गोविंदपुर के ग्रामीणों में से रोशन लाल यादव, लाल मोहम्मद, मनोज कुमार यादव, दिलीप यादव,पिंटू यादव आदि ने बेरमो के वन क्षेत्र पदाधिकारी को हस्ताक्षरयुक्त पत्र में लिखा है कि नया बस्ती से सीसीएल काॅलोनी गोविंदपुर काॅलोनी के बीच सड़क किनारे वन भूमि की जमीन पर कुछ लोगों के द्वारा अवैध कब्जा किया जा रहा है। अवैध कब्जा के क्रम में...
मोर्चा ने किया गेट में ताला बंदी का प्रयास, 28 को होगी त्रिपक्षीय वार्ता

मोर्चा ने किया गेट में ताला बंदी का प्रयास, 28 को होगी त्रिपक्षीय वार्ता

Breaking News, आदिवासी, झारखण्ड
बोकारो ः पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत झारखण्ड आंदोलनकारी युवा मोर्चा ने शुक्रवार को नियोजन, मुआवजा व भूमि वापसी की मांग को लेकर बीएसएल के टीसी गेट में तालाबंदी आंदोलन किया, जिसमें काफी संख्या में विस्थापित पहुंचे। लगभग तीन घंटे नारेबाजी और सभा करने के बाद रैयतों की वार्ता चास अंचल के सीओ दिवाकर दुबे के साथ हुई, जिसमें दुबे ने आगामी 28 नवंबर को प्रबंधन के साथ त्रिपक्षीय वार्ता कराने की बात कही। मोर्चा अध्यक्ष ललित नारायण ने बताया कि प्लांट प्रबंधन विस्थापितों को नियोजन देने की बात तो करता है, लेकिन फिर चिर निद्रा में सो जाता है। बीएसएल का एसएमएस तीन और बाउंड्री रैयतों की जमीन पर बना है, जिसका आज तक मुआवजा आदि कुछ नहीं मिला है। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट ने भी रैयतों के हित में फैसला सुनाया है। उसके बाद भी प्रबंधन चुप्पी साधे हुए है। कहा कि आगामी वार्ता सफल नहीं हुई तो रैयत बाउंड्री...
चन्दनक्यारी के झालबरदा में दिखा छोटा शावक

चन्दनक्यारी के झालबरदा में दिखा छोटा शावक

Breaking News, आदिवासी, झारखण्ड
  चास (Bokaro) : चन्दनक्यारी के झालबरदा जंगल में रविवार की रात को दो तेंदआ देखा गया. जिसके बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया. इलाके के लोगों ने पहली बार आदमखोर पशु को ग्रामीणों ने देखा हैं. जिसमें एक शावक भी है. जैसे ही रात में तेंदुवे को देखे जाने की जानकारी बरमसिया पुलिस को मिली, तुरन्त पुलिस ने लोगों को सावधान रहने की चेतावनी दी. रात भर पुलिस इलाके में गश्ती करती रही.   वहीं झालबरदा के डूंगरीटांड जंगल के पास झालबरदा गांव निवासी बबन तिवारी नामक एक व्यक्ति बाजार से खरीदारी कर घर लौट रहा था. उसी दौरान जंगल के रास्ते में दो तेंदुआ पर उनकी नजर पड़ी, तो तेंदुवे को देखकर उनके होश उड़ गए. उस वक्त अपने गांव न जाकर वापस बरमसिया लौट गए. जहां पर लोगों को जानकारी दी. साथ ही अपने गांव वालों को भी सतर्क रहने को कहा. बताया जाता है कि पुरुलिया के कोटशिला वन क्षेत्र से सिमनी जंग...
सुरक्षाबलों के लिए लगाए गए 9 सिलेंडर बम को किया गया डिफ्यूज

सुरक्षाबलों के लिए लगाए गए 9 सिलेंडर बम को किया गया डिफ्यूज

आदिवासी, झारखण्ड, राजनीति
लातेहार: एसपी को मिली गुप्त सूचना पर जिला पुलिस और सीआरपीएफ के द्वारा संयुक्त रूप से छापेमारी अभियान चलाकर बूढ़ा पहाड़ की तलहटी में बसे लाटू जंगल में 9 सिलेंडर बम को डिफ्यूज कर दिया है. एसपी अंजनी अंजन की सटीक सूचना तंत्र ने एक बार फिर से नक्सलियों के मंसूबे को ध्वस्त कर दिया. लातेहार एसपी अंजनी अंजन को गुप्त सूचना मिली थी कि बूढ़ा पहाड़ की तलहटी में बसे लाटू जंगल के आसपास नक्सलियों के द्वारा सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाने को लेकर बड़ी संख्या में सिलेंडर बम लगाए गए हैं. इस सूचना के बाद सीआरपीएफ 218 बटालियन और जिला पुलिस के द्वारा संयुक्त रूप से जंगल में छापेमारी अभियान चलाया.सर्च अभियान के दौरान जंगल में छिपा कर रखे गए 9 सिलेंडर बम बरामद किए गए. बाद में सभी सिलेंडर बम को जंगल में ही बम निरोधक दस्ते के द्वारा डिफ्यूज कर दिया गया. हालांकि पुलिस और सुरक्षाबलों के द्वारा अभी भी इलाके में ...
आदिवासी पत्रकार व आदिवासी पत्रकारिता की आवश्यकता

आदिवासी पत्रकार व आदिवासी पत्रकारिता की आवश्यकता

आदिवासी, विचार
Article by Purnendu Pushpesh आदिवासी पत्रकारिता एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है जो आदिवासी समुदायों की आवाज़ को सुनने और समझने में मदद करता है, और उनकी समस्याओं और उनके साथ हो रही घातक प्रभावों की चर्चा करता है। यहां आदिवासी पत्रकारिता के मुख्य उद्देश्य और आवश्यकताओं की कुछ मुख्य बातें हैं: सत्यता और जानकारी का प्रसारण: आदिवासी पत्रकारों का प्रमुख कार्य असली और सत्यपूर्ण जानकारी को पहुँचाना है, ताकि आदिवासी समुदायों के लोग अपनी समस्याओं को सही समय पर समझ सकें और उनके लिए सही समाधान ढूंढ सकें। समुदाय के अधिकार की सुरक्षा: आदिवासी पत्रकारों का उद्देश्य अपने समुदाय के अधिकारों की सुरक्षा करना और उन्हें उनके विरुद्ध हो रही उलझनों से समर्थन प्रदान करना होता है। भ्रष्टाचार और अन्य दुर्भावनाओं का पर्दाफाश: पत्रकारिता के माध्यम से आदिवासी समुदायों के बीच में हो रहे भ्रष्टाचार और अन्य दुर्भावनाओं का प...
गंदे शौचालय के खिलाफ स्कूली छात्रों ने खोला मोर्चा, किया सड़क जाम

गंदे शौचालय के खिलाफ स्कूली छात्रों ने खोला मोर्चा, किया सड़क जाम

आदिवासी, झारखण्ड
  गिरिडीह। जिले के पीरटांड़ प्रखंड अंतर्गत खुखरा पंचायत के प्लस टू उच्च विद्यालय बरियारपुर के बच्चे गुरुवार को आक्रोशित दिखे. बच्चों ने बीच सड़क पर उतरकर अपना गुस्सा जाहिर किया और चिरकी-पलमा सड़क को जाम कर दिया. बाद में शिक्षक और अभिभावक मौके पर पहुंचे और बच्चों को मनाने की काफी कोशिश की गई. बच्चों को कहा गया कि सभी समस्याओं का समाधान कर दिया जाएगा, जिसके बाद बच्चे वापस क्लास में चले गये. प्लस टू हाई स्कूल बरियारपुर में शौचालय की समुचित व्यवस्था नहीं है. शौचालय गंदगी से भरा पड़ा है. इससे सबसे ज्यादा परेशानी लड़कियों को हो रही है. इस समस्या के समाधान के लिए कई बार मांग की गई, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है. बार-बार अनुरोध करने के बाद भी कोई समाधान नहीं निकला तो गुरुवार की सुबह प्रार्थना के बाद बच्चे हाथों में तख्तियां लेकर सड़कों पर उतर आये. बच्चे शौचालय की सफाई के साथ-साथ जल्द...
झारखंड में आदिवासियों के साथ राजनीति

झारखंड में आदिवासियों के साथ राजनीति

आदिवासी, झारखण्ड, विचार
Article by Purnendu Pushpesh झारखंड में राजनीति और आदिवासी समुदायों के बीच संबंध जटिल हैं और पिछले कुछ वर्षों में विकसित हुए हैं। झारखंड में एक महत्वपूर्ण आदिवासी आबादी है, और उनकी राजनीतिक भागीदारी और मुद्दे राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में बहुत महत्वपूर्ण हैं। झारखंड में आदिवासी समुदायों से जुड़ी राजनीति के संबंध में कुछ प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं: जनजातीय प्रतिनिधित्व: झारखंड में जनजातीय समुदायों के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए आरक्षण प्रणाली लागू है। राज्य विधान सभा और संसद में कुछ प्रतिशत सीटें अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के लिए आरक्षित हैं। इससे आदिवासी नेताओं और प्रतिनिधियों को राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का मौका मिला है। आदिवासी राजनीतिक दल: झारखंड में कई राजनीतिक दल हैं जो मुख्य रूप से आदिवासी मुद्दों पर केंद्रित हैं और आदिवासी नेता सबसे आ...
झारखंड में जनजातियाँ, आदिवासियों की समस्याएँ और उनका समाधान

झारखंड में जनजातियाँ, आदिवासियों की समस्याएँ और उनका समाधान

आदिवासी, झारखण्ड, विचार
Article by Purnendu Pushpesh भारत के कई अन्य हिस्सों की तरह झारखंड में भी जनजातीय समुदायों को कई प्रकार की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उनकी समस्याओं को समझना और उनके सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संदर्भों का सम्मान करते हुए समाधान की दिशा में काम करना महत्वपूर्ण है। झारखंड में जनजातीय समुदायों द्वारा सामना किए जाने वाले कुछ प्रमुख मुद्दे और संभावित समाधानों में शामिल हैं: भूमि अधिकार एवं विस्थापन: समस्या: औद्योगीकरण, खनन और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कारण जनजातीय समुदायों को अक्सर भूमि हस्तांतरण का सामना करना पड़ता है। इसके परिणामस्वरूप विस्थापन और आजीविका का नुकसान होता है।उपाय: जनजातीय भूमि अधिकारों की रक्षा करने वाले कानूनों को लागू करना और मजबूत करना, जनजातीय भूमि पर किसी भी विकास परियोजना से पहले स्वतंत्र, पूर्व और सूचित सहमति सुनिश्चित करना और उचित म...