कुरीतियों को इतिहास बनाने का आह्वान
उपायुक्त ने समाज में व्याप्त बाल विवाह और डायन जैसी कुप्रथाओं पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि ये विकास की राह में सबसे बड़ी बाधा हैं। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए राजा राम मोहन राय, सावित्री बाई फुले और फातिमा शेख के संघर्षों को याद किया। उपायुक्त ने कहा कि जिस तरह पुराने समय की कुरीतियां आज इतिहास का हिस्सा बन गई हैं, हमें बाल विवाह और डायन कुप्रथा को भी जड़ से मिटाकर इतिहास बनाना होगा।
अबला नहीं, सबला बनें महिलाएं
महिलाओं के आत्मसम्मान और स्वतंत्रता पर जोर देते हुए उपायुक्त ने कहा कि स्त्रियों को अपनी अभिव्यक्ति का पूरा अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला का पहनावा, श्रृंगार और जीवनशैली उसकी अपनी पसंद है, इसे तय करने का हक न पति को है, न बेटे को। उन्होंने आह्वान किया कि महिलाएं पुरुषों पर आश्रित होना बंद करें और अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानें। उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा- जो हाथ आपको आशीर्वाद देने के लिए उठें और कहें- खुश रहो, खूब तरक्की करो- सिर्फ उनका ही आशीर्वाद लें।
कार्यशाला के दौरान यह जानकारी साझा की गई कि गोमिया प्रखंड पूरी तरह बाल विवाह मुक्त हो चुका है। उपायुक्त ने इसी तर्ज पर पूरे जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प दिलाया और उपस्थित जनसमूह को शपथ दिलाई।
बेटा-बेटी में फर्क मिटाना नैतिक जिम्मेदारी : डीडीसी
उप विकास आयुक्त श्रीमती शताब्दी मजूमदार ने आंकड़ों के जरिए समाज को आगाह किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में हर पांच में से एक विवाह बाल विवाह हो रहा है, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर शीर्ष देशों में शामिल है। इसे टॉप से बॉटम पर लाने के लिए हमें प्रो-एक्टिव होना होगा। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासन का काम नहीं, बल्कि हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने किसी भी ऐसे मामले की सूचना तुरंत पुलिस या संबंधित अधिकारियों को देने की अपील की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला परिषद अध्यक्ष श्रीमती सुनीता देवी ने कहा कि बाल विवाह बेटियों को शिक्षा से वंचित कर उनके स्वास्थ्य और भविष्य को असुरक्षित बना देता है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों, सहिया और आंगनबाड़ी सेविकाओं से इसे रोकने के लिए ग्रामीण स्तर पर मोर्चा संभालने की अपील की।
सूचना तंत्र का लें सहारा, योजनाओं का उठाएं लाभ : डीएसडब्ल्यूओ
जिला समाज कल्याण पदाधिकारी (डीएसडब्ल्यूओ) श्रीमती सुमन गुप्ता ने कानूनी प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि प्रमंडल से लेकर पंचायत स्तर तक बाल विवाह निषेध पदाधिकारी तैनात हैं। उन्होंने लोगों से डायल 112 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 का उपयोग करने को कहा। साथ ही सावित्री बाई फुले किशोरी समृद्धि योजना और मुख्यमंत्री कन्यादान योजना जैसी कल्याणकारी योजनाओं पर प्रकाश डाला।
सहायक निदेशक श्रीमती सुमन सिंह ने प्रतिभागियों को महिला एवं बाल सुरक्षा से संबंधित कानूनों और शिकायत निवारण तंत्र की विस्तृत जानकारी दी। कार्यशाला में जिला शिक्षा अधीक्षक अतुल चौबे, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी रवि कुमार, सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी अविनाश कुमार सिंह सहित कई गणमान्य और कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की छात्राएं उपस्थित रहीं।
