
बोकारो ः सरस्वती शिशु विद्या मंदिर 9/डी बोकारो में दादा-दादी नाना-नानी सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं विद्यालय प्रबंधकारिणी समिति के संरक्षक रामनाथ बैठा ने कहा कि हमारी संस्कृति में 33 कोटि देवी-देवताओं के बीच माता-पिता, गुरु के साथ-साथ घर के बुजुर्गों को प्रत्यक्ष देवता कहा गया है। उनके प्रति आदर भाव जगाकर हम अपनी सभ्यता और संस्कृति का संरक्षण कर सकते हैं। परिवार के बुजुर्ग उस वृक्ष के समान हैं, जिसकी शीतल छाया में छोटों को स्नेह मिलता है और परिवार रूपी मंदिर के इन देवता के आशीर्वाद से उन्नत परिवार सुखमय जीवन व्यतीत करता है। पाश्चात्य सभ्यता के परिवेश में यह विलुप्ति के कगार पर है। अपनी संस्कृति को पुनः स्थापित करने के लिए इस प्रकार का कार्यक्रम विद्यालय में होना अति आवश्यक है। इससे एक संतान का अपने बड़ों के प्रति और बड़ों का अपनी संतान के प्रति दायित्व बोध होता है। आज का यह कार्यक्रम अविस्मरणीय है। यहां से ही बच्चों के अंदर अपने बड़ों के प्रति सम्मान का बीजारोपण होगा।
विद्यालय के प्राचार्य राजेंद्र कामत ने आगंतुक अतिथियों को संबोधित करते हुए कहा कि जहां बुजुर्गों का सम्मान होता है, वहीं देवता का निवास होता है। विद्या भारती ने इस कार्यक्रम को अपनी योजना में शामिल कर वर्तमान पीढ़ी को पुरानी परंपरा से जोड़ने का एक सफल प्रयास किया है। आज पाश्चात्य शिक्षा के प्रभाव से बुजुर्गों को घर में वह सम्मान नहीं मिल पा रहा है, जो उन्हें मिलना चाहिए। हमारे बुजुर्ग अपना पूरा जीवन अपने परिवार रूपी वट वृक्ष को बड़ा करने में खपा देते हैं, उन्हें भी इस अवस्था में प्रेम स्नेह की आवश्यकता पड़ती है। इस अंतिम पड़ाव पर उनका मान सम्मान होता रहे, ऐसे ही समाज की परिकल्पना विद्या भारती करता है और सदैव इस परंपरा को निभाने के लिए हम कृत संकल्पित हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन सह- वंदना के साथ किया गया। इस अवसर पर भैया-बहनों ने अपने दादा-दादी के पांव पखारे, आरती और पुष्पार्चन किया। बच्चों ने दादा-दादी के सम्मान में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रसार पदाधिकारी, चास (बोकारो) श्रीमती नूतन बाला एवं मनोरंजन प्रसाद के साथ-साथ विद्यालय प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष अभय श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष कृष्णा राय, निरंजन कुमार सिंह, सचिव रंजन कुमार कर्ण, सह- सचिव जी पी सिंह, अभिभावक प्रतिनिधि विनोद प्रजापति व सभी आचार्य, दीदी और लगभग 150 दादा-दादी एवं नाना-नानी उपस्थित रहे।